छंद किसे कहते हैं

छंद क्या है?

छंद शब्द संस्कृत भाषा से आया है, जिसका अर्थ है लय या ताल। काव्य में वर्णों और मात्राओं की संख्या, उनके क्रम, और यति (विराम) के नियमों के आधार पर छंद का निर्माण होता है।

छंद काव्य को सुंदर और प्रभावशाली बनाते हैं। वे भावनाओं को व्यक्त करने में सहायक होते हैं और कविता को सरलता से याद रखने में भी मदद करते हैं।

छंद के मुख्य अंग हैं:

  • वर्ण: वर्णों की संख्या से छंद का मात्रा निर्धारित होता है।
  • मात्रा: मात्राओं की संख्या से छंद की लय और गति निर्धारित होती है।
  • यति: यति विराम को दर्शाता है जो छंद को मधुर बनाता है।
  • गण: वर्णों के समूह को गण कहा जाता है।
  • तुक: तुक से छंद में संगीत और प्रवाह आता है।

छंद के प्रमुख प्रकार हैं:

  • मात्रिक छंद: मात्रिक छंद में मात्राओं की संख्या निश्चित होती है, वर्णों की नहीं।
  • वार्णिक छंद: वार्णिक छंद में वर्णों की संख्या निश्चित होती है, मात्राओं की नहीं।
  • मुक्त छंद: मुक्त छंद में वर्णमात्रा, और यति के नियमों का पालन नहीं होता है।

उदाहरण:

  • मात्रिक छंद: दोहा (8 मात्राएँ)
  • वार्णिक छंद: चौपाई (4 वर्ण)
  • मुक्त छंद: नवगीत

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निष्कर्ष:

छंद काव्य का एक महत्वपूर्ण अंग है। छंद काव्य को सुंदर, प्रभावशाली, और यादगार बनाते हैं। छंद के विभिन्न प्रकारों का प्रयोग करके कवि अपनी भावनाओं को प्रभावी ढंग से व्यक्त कर सकते हैं।